Life Reflecter Ravi Ajmeriya

Life Reflecter Ravi Ajmeriya
Blog Is My Soul Which Relect My Life

शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

जाग तुझको दूर जाना है

जाग तू  जाग तुझको दूर जाना है
ये मंजिल नहीं है  तेरी, न ही मुकाम 
तू चल, तू चल, तुझे अभी दूर जाना है 
घड़े भर भर का पानी पीकर पीकर तू यूँ न इतरा 
तुझे तो अभी समुद्र पाना है 
जाग तू जाग तुझको दूर जाना है

अभी तो शुरुआत है मेरे दोस्त सफर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त 
तूफ़ान  आयेंगे , प्रलय  आयेंगे 
जीवन को हिला देने वाले पल आयेंगे 
पर तू चल ,तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
आंसमा को जमीं भी दिखलानी है , तारो को जमीं पैर भी लाना है 
मोह माया भी जक्ड़ेगी पर तुझे उनसे भी पार पाना है
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना है 

कलयुगी जीवन में हर ओर अँधेरी छाया है 
यह सब तो  प्रभु की माया है 
खेल है ये उसका , तू  सिपाही इसका 
खेल तो तुझे खेलना ही होगा 
तू डर मत , तू हार मत , न ही घबरा
चल तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
अंतरमन की है आवाज तुझे बनना है हर दर्द की आवाज 
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना है 

जीवन का आकर्षण भू तुझे बुलाएगा 
इच्छाये भी डालेगी तेरे पथ में रोड़ा 
अहंकार का रावण भी तुझे बुलाएगा 
पर  तू अपनी शक्ति को व्यर्थ मत जाने दे
कीचड में भी कमल का फूल  जाने दे 

तू चल ,तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना  है !