Life Reflecter Ravi Ajmeriya

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बुधवार, 26 मार्च 2014

लौट आओ


मेरे दिल के गलियारे में मुहब्बत के दीप जलाकर तुम कहाँ चली गयी
कभी रौशन हुआ करता तुमसे से जहाँ
उस रौशनी को अपने में ही समाकर तुम कहाँ चली गयी
जिसने कभी टूटती बिखरती माला सी जिंदगी में जीवन के मोती पिरोये थे
जिसने कभी मेरी एक खुशी के लिए को दुखों के कांटे चुभोये थे
मेरी नफरतों में भी हसीं क्षण ढूँढ़ने वाली तुम कहाँ चली गयी
मेरी यादों में खुद को बसाकर तुम कहाँ चली गयी
बस बहुत हुआ तड़पना, बहुत हुआ यादों कि गर्दिश में गोते लगवाना
अब तो लौट आओ , अब तो लौट आओ !

उन हसीं सपनों के साथ जो हमने कभी संजोये थे
उन हसीं यादों  के साथ जो हमने कभी जीये थे
उन हसीं वक़्त के साथ जो हमने कभी साथ बिताये थे
अब तो लौट आओ , अब तो लौट आओ !

तुम बिन जीना ,अब मन को नहीं भाता
हर पल बस तुम पे मर मिटना चाहता
तुम पे  कुर्बान  होने को अब दिल है चाहता
बिना तुम्हरे अब मुझसे रहा नहीं जाता !

एक चाह  तुम थी , एक प्यास तुम थी
जीवन जीने की  एक आश तुम थी
अब यूँ न तड़पाओ ,थमते दिल कि धड़कनो को यूँ दोबारा न धड़काओ
अब तो लौट आओ अब तो लौट आओ !!! :'(

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