मेरे दिल के गलियारे में मुहब्बत के दीप जलाकर तुम कहाँ चली गयी
कभी रौशन हुआ करता तुमसे से जहाँ
उस रौशनी को अपने में ही समाकर तुम कहाँ चली गयी
जिसने कभी टूटती बिखरती माला सी जिंदगी में जीवन के मोती पिरोये थे
जिसने कभी मेरी एक खुशी के लिए को दुखों के कांटे चुभोये थे
मेरी नफरतों में भी हसीं क्षण ढूँढ़ने वाली तुम कहाँ चली गयी
मेरी यादों में खुद को बसाकर तुम कहाँ चली गयी
बस बहुत हुआ तड़पना, बहुत हुआ यादों कि गर्दिश में गोते लगवाना
अब तो लौट आओ , अब तो लौट आओ !
उन हसीं सपनों के साथ जो हमने कभी संजोये थे
उन हसीं यादों के साथ जो हमने कभी जीये थे
उन हसीं वक़्त के साथ जो हमने कभी साथ बिताये थे
अब तो लौट आओ , अब तो लौट आओ !
तुम बिन जीना ,अब मन को नहीं भाता
हर पल बस तुम पे मर मिटना चाहता
तुम पे कुर्बान होने को अब दिल है चाहता
बिना तुम्हरे अब मुझसे रहा नहीं जाता !
एक चाह तुम थी , एक प्यास तुम थी
जीवन जीने की एक आश तुम थी
अब यूँ न तड़पाओ ,थमते दिल कि धड़कनो को यूँ दोबारा न धड़काओ
अब तो लौट आओ अब तो लौट आओ !!! :'(