Life Reflecter Ravi Ajmeriya

Life Reflecter Ravi Ajmeriya
Blog Is My Soul Which Relect My Life

शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

जाग तुझको दूर जाना है

जाग तू  जाग तुझको दूर जाना है
ये मंजिल नहीं है  तेरी, न ही मुकाम 
तू चल, तू चल, तुझे अभी दूर जाना है 
घड़े भर भर का पानी पीकर पीकर तू यूँ न इतरा 
तुझे तो अभी समुद्र पाना है 
जाग तू जाग तुझको दूर जाना है

अभी तो शुरुआत है मेरे दोस्त सफर तो अभी बाकी है मेरे दोस्त 
तूफ़ान  आयेंगे , प्रलय  आयेंगे 
जीवन को हिला देने वाले पल आयेंगे 
पर तू चल ,तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
आंसमा को जमीं भी दिखलानी है , तारो को जमीं पैर भी लाना है 
मोह माया भी जक्ड़ेगी पर तुझे उनसे भी पार पाना है
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना है 

कलयुगी जीवन में हर ओर अँधेरी छाया है 
यह सब तो  प्रभु की माया है 
खेल है ये उसका , तू  सिपाही इसका 
खेल तो तुझे खेलना ही होगा 
तू डर मत , तू हार मत , न ही घबरा
चल तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
अंतरमन की है आवाज तुझे बनना है हर दर्द की आवाज 
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना है 

जीवन का आकर्षण भू तुझे बुलाएगा 
इच्छाये भी डालेगी तेरे पथ में रोड़ा 
अहंकार का रावण भी तुझे बुलाएगा 
पर  तू अपनी शक्ति को व्यर्थ मत जाने दे
कीचड में भी कमल का फूल  जाने दे 

तू चल ,तू चल तुझे अभी दूर जाना है 
जाग तू  जाग  तुझको दूर जाना  है !

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

Quotes - From Heart

"लड़के की बातों पर
लड़की की आँखों पर
कभी मत जाना क्यूंकि कुछ ही देर बाद आप को ठगा महसूस करेंगे "

एक गाना सही लिखा गया है नैनों के उपर भला बाँदा देखे न पराया न सगा रे नैनों को तो डसने का चस्का लगा रे नैनों का ज़हर नशीला रे नैनों का ज़हर नशीला बादलों में सतरंगिया बोये भोर तलक बरसाए नैना बाबरा कर देंगे नैना ठग लेंगे
             नैना ठग लेंगे
                       नैना ठग लेंगे !!!          

                                                                                                          बाबा रविदास महाराज जी  

Love Message



Hiiii ….guys my this creativity is dedicated to my love, my jaan –
“ ek pagli ladki ”

Mujhe wo rude bando ki tarah ATTITUDE  dikhana bhi nahi aata , aur to aur mujeh un simple bando ki tarah PYAR jatana bhi………….
          Kya karu mujeh nahi aata …..
 Mujeh bigdelo ki tarah GUSSA dikhana bhi nahi aata , aur to aur na hi mujhe aata hai FLERT karna …
        kya karu mujeh nahi aata …….
Kabhi- kabhi sochta hu ki PATHHARDIL  hu me , kyunki FEELINGS ke liye mene koi jagah hi nahi banai apne dil me…….
            Sayad banai hoti to Ae_Dosto  mera PYAR  mere saath hota , mera YAR mera ssaath hota , mera DILDAR  mera saath hota , PER kya karu ye dunia ke AUDHANG me kabhi seekh hi nahi paaya , mujeh achha nahi lgta jhuth ka sahara , aur to aur na hi mujeh aata hai kisi ke jajbaato ke sath khelna
Per kya karu mujeh nahi aata …….
   SAyad aata to aaj mera PYAR mere saath hota , mera YAR mera saath hota , mera DILDAAR mere  saath hota
Per kya karu mujeh nahi aata ……….
Mere paas thi to keval ek sachhe PYAR ki takat , PER kya kare aajkal ke in AUDHANGO  ke aage mere pyar ki bisat hi kyat hi
                             Me HAAR gya , ME  haar gya, Me Haar GYA
                                               AUDHANG  rachne waalo ki JEET hui PER me HAAR gya

Lekin abhi bas keval ek hi gujarish hai tumse – “ tum to jeete ho har ek pal , ME to hardum hi haara AE_JAAN Tum haar ke dil apna meri jeet amar kar do , meri jeet amar kar do…………………………………

BY- Ravi Ajmeriya                    Copyright number- 2006/52 ©
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काश तुम मेरी होती


काश तुम मेरी  होती तो जीवन आज यूँ ना होता
मिल जाती सारी खुशियाँ तो जीवन आज यूँ न होता 
गर मिल जाती तुम तो अकेलेपन शिकार न होता 
जीवन में अंधकार न होता किस्मत से कंगाल न होता 
एक मासूम लड़का यूँ बर्बाद न होता और मन यूँ उदास न होता 
काश तुम मेरी  होती तो जीवन आज यूँ ना होता !


पर सच्चे प्यार की तुमने क़द्र न जानी 
बड़ी आसानी से हो गयी हमसे बेगानी 
एक दिल था वो भी तोड़कर ही मानी 
धड़कते दिल को थामकर ही मानी 
ये जानकर  मुझे हुई बड़ी हैरानी 
काश तुम मेरी  होती तो जीवन आज यूँ ना होता !


जज्बातों के साथ खेलकर तुमने क्या पा लिया 
सच्चे प्यार को फरेब के तराजू में तोलकर तुमने क्या पा लिया 
धड़कते दिल को यादों की गर्दिश में डालकर तुमने क्या पा लिया 
जिसके दिल और दिमाग में तुम थी , दुःख और सुख में तुम थी 
जिसकी हर बेचैनी तुम थी , हर बात तुम थी 
जिसके दिल का करार तुम थी , हर  तुम थी 
उसको राह में अकेला छोड़कर तुमने क्या पा लिया 
तुमने कुछ पाया ना पाया हो ,
पर मेने जरूर पा लिया , पूछोगी नहीं की क्या पा लिया 
तनहइयो का साथ पा लिया ,यादों का बोझ पा लिया 
तो गमों और उदासी का हर एक मुकाम पा लिया 
काश तुम मेरी  होती तो जीवन आज यूँ ना होता 

दास्ताँ अकेलेपन की



अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है
ग़मों और दुखों का और फैला समां है
यही प्यार में असफल लोगों की दास्ताँ है
जहाँ जीना बेमानी सा लगता है और मरना भी
यही तो अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है

केसे जीता है अकेलेपन में इंसान
बतलाना कठिन सा लगता है
न ही साथ होता है न ही सहारा
और न ही हाथों में हाथ होता है
एक एक रात उसको कालजयी सी लगती है
कभी न खत्म ना होने वाली बात सी लगती है
डरा डरा सा बुझा बुझा सा जब  अपनी जिन्दगी जीता है
भूली बिसरी यादों को जब द्वारा जीता है
अकेलेपन साया उसके उतने करीब होता है
यही तो अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है

हर इंसान अधुरा होता  है
पाकर किसी का साथ ही वह पूरा होता है
मगर हर इंसान हाथों के मजबूर होता है
किसी के हाथों में प्यार तो किसी के हाथों में सूनेपन का हार होता है
लेकिन प्यार में डूबा हुआ इंसान तो कच्चे घड़े के सामान होता है
छोटे दुःख और बंधन से वह दुखी होता है
अकेलेपन की तपिश से निकल कर आया इंसान ही सछ इंसान होता है
हर दुःख और दर्द से मनो जैसे अनजान रहता है
यही तो अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है

कभी भरी दोपहरी में रुलाता है अकेलापन
कभी तन्हाई की रातों में जगाता है अकेलापन
किसी को क्या एहसास कितना सताता है अकेलापन
कुछ खोने का अब गम नहीं ना पाने की ख़ुशी
जो चाह था वो मिला नहीं की लाख कोशिशें मगर हुआ  हांसिल नहीं
डर तो केवल इस बात का है की कहीं मेरे अस्तित्व को न ही डूबे ये अकेलापन
यही तो अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है

माँगा था प्यार तेरा तूने जुदाई दी
चाहा था साथ तेरा तूने बेवफाई दी
मांगी थी खुशियों की बरसात तूने आंसुओं की धार दी
सूनेपन का तोहफा अकेलेपन की सौगात दीयही तो अकेलेपन की क्या दास्तां है
खुद पे शुरू खुद पे ही खत्म जहाँ है

जिंदगी- एक अनसुलझी सी पहेली

एक अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी
जो सुलझती कम उलझती ज्यादा 
कभी कभी हाईवे सी सीधी और सरल है जिंदगी
कभी गाँव टूटी फूटी पगडण्डी सी है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी 

प्रकर्ति का नियम है जिंदगी 
इंसान उम्र  है जिंदगी 
कभी खुसग्वार तो कभी दुश्वार सी है जिंदगी 
रोचकता तो कभी रोमांचकता की परिपूर्ण है जिंदगी 
कभी रिश्तो  सी है जिंदगी 
तो कभी प्रेम की परिभाषा सी है जिंदगी 
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

जीवन में  रंग भरती है जिंदगी
कभी हसती तो कभी रुलाती है जिंदगी
सुख और दुःख की बारिस  तरबतर होती है जिंदगी
एलियंस की अनसुलझी पहेली की तरह ही है इन्दगी
 तो कभी ब्रह्माण्ड के अटूट ज्ञान की तरह है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली की तरह है जिंदगी

इंसानी चमत्कारों के कारण जीतती है जिंदगी
तो कभी कुदरती आपदाओ के सामने बेबस सी नज़र आती है जिंदगी
किसी के लिए सोहरत है जिंदगी
किसी के लिए दौलत है जिंदगी
किसी के लिए ज़न्सेवा है जिंदगी
तो किसी के लिए दो वक़्त की रोटी है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

बच्चों के लिए उनकी माँ है जिंदगी
विधार्थियों के लिए उनका लक्ष्य है जिंदगी
नवयुवको के लिए उनका भविष्य है जिंदगी
तो प्रेमी के लिए उसका प्यार है जिंदगी
बुदापे में बच्चों का साथ है जिंदगी
तो अंत समय में जिन्दगी का मोह है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

किसी के लिए काम वासना है जिंदगी
तो किसी के लिए परमात्मा से प्यार है जिंदगी
इच्छाओं का दूसरा नाम है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

रिश्ते

कितने अजीब रिश्ते है यहाँ पर 
कभी कभी अपने थे कभी कभी बेगाने है 
रिश्तों का बोझ लेकर बच्चा पैदा होता है 
नवजीवन के रूप के रूप में रिश्तों की डोर होता है 
इससे ही तो लोगों को अपनी जिम्मेदारी का बोध होता है 
सच कहु तो इंसान के रूप में रिश्ता ही तो पैदा होता है 
रिश्तों की चादर ओड़कर ही इंसान सोता है 

जो इंसान रिश्तों को अलग रखकर अपना घर बनता है 
उसे इंसान की संज्ञा से ही वंचित  कर दिया जाता है 
रिश्ते के पैदा ही  एक नयी लहर दौड़ जाती है 
कोई माँ तो कोई पिता हो जाता है 
कोई मामा कोई  चाचा हो जाता है 
कोई पति पत्नी तो कोई 
गर्लफ्रेंड - बॉयफ्रेंड हो जाता है 

कभी भावनाओ के तले रिश्ते बनाये जाते है 
तो कभी तले रिश्ते निभाए जाते है 
कभी कभी रिश्ते निभाना मजबूरी लगता है 
तो कभी कभी बंधन और रिश्तो में फर्क  मुश्किल लगता है 
कभी कभी स्वार्थ का दूसरा रूप  दिखाई पड़ते है रिश्ते 
तो कभी जीने का सहारा लगते है रिश्ते
तो कभी रिश्तों की आड़ में ही कलंकित होते है रिश्ते 

कभी मजबूत तो कभी कमजोर पड़ जाते है रिश्ते
तो कभी स्वार्थ ,लालच ,भय रुपी शत्रुओं से भी जूझते है रिश्ते
कभी सहर्ष प्रेम, आत्मीयता से मजबूत होते है रिश्ते
पर रिश्ते तो रिश्ते है इन्हें कोन बदल पाया है
क्यूंकि प्रकर्ति का नियम है रिश्ते
समय का बोध है रिश्ते

कितने अजीब रिश्ते है यहाँ पर
कभी कभी अपने तो कभी कभी कभी बेगाने है !