Life Reflecter Ravi Ajmeriya

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शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

जिंदगी- एक अनसुलझी सी पहेली

एक अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी
जो सुलझती कम उलझती ज्यादा 
कभी कभी हाईवे सी सीधी और सरल है जिंदगी
कभी गाँव टूटी फूटी पगडण्डी सी है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी 

प्रकर्ति का नियम है जिंदगी 
इंसान उम्र  है जिंदगी 
कभी खुसग्वार तो कभी दुश्वार सी है जिंदगी 
रोचकता तो कभी रोमांचकता की परिपूर्ण है जिंदगी 
कभी रिश्तो  सी है जिंदगी 
तो कभी प्रेम की परिभाषा सी है जिंदगी 
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

जीवन में  रंग भरती है जिंदगी
कभी हसती तो कभी रुलाती है जिंदगी
सुख और दुःख की बारिस  तरबतर होती है जिंदगी
एलियंस की अनसुलझी पहेली की तरह ही है इन्दगी
 तो कभी ब्रह्माण्ड के अटूट ज्ञान की तरह है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली की तरह है जिंदगी

इंसानी चमत्कारों के कारण जीतती है जिंदगी
तो कभी कुदरती आपदाओ के सामने बेबस सी नज़र आती है जिंदगी
किसी के लिए सोहरत है जिंदगी
किसी के लिए दौलत है जिंदगी
किसी के लिए ज़न्सेवा है जिंदगी
तो किसी के लिए दो वक़्त की रोटी है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

बच्चों के लिए उनकी माँ है जिंदगी
विधार्थियों के लिए उनका लक्ष्य है जिंदगी
नवयुवको के लिए उनका भविष्य है जिंदगी
तो प्रेमी के लिए उसका प्यार है जिंदगी
बुदापे में बच्चों का साथ है जिंदगी
तो अंत समय में जिन्दगी का मोह है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

किसी के लिए काम वासना है जिंदगी
तो किसी के लिए परमात्मा से प्यार है जिंदगी
इच्छाओं का दूसरा नाम है जिंदगी
अनसुलझी सी पहेली है जिंदगी

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